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माध्यस्थता, सुलह एवं वैकल्पिक विवाद निवारण विधि

  • माध्यस्थता, सुलह एवं वैकल्पिक विवाद निवारण विधि

     1400
     1200
  • Author   :    Nitu Nuwal
    Year of Publication   :   2026
    ISBN   :   9789393934253
    Language   :   Hindi
    Binding   :   Hardcover
    Pages   :   416
    Size   :   24 cm
    Categories   :   2026, Hindi, Law
    Price  :  1200
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    इस कृति में ‘‘माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996’’ के द्वारा माध्यस्थम् प्रक्रिया की ओर प्रभावी रूप दिया गया है तथा विदेशी पंचाटों के भारत मे प्रवर्तन करने सम्बन्धी प्रावधान का भी उल्लेख किया गया है। पुस्तक में माध्यस्थता और सुलह (संशोधन) अधिनियम, 2015, माध्यस्थता और सुलह (संशाोधन) अधिनियम, 2019, माध्यस्थता और सुलह (संशोधन) अधिनियम, 2021, माध्यस्थता अधिनियम 2023 को समाहित किया गया है। इस पुस्तक में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 एवं विधिक सेवा प्राधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2002 की विशद् व्याख्या की गई है। इस कृति में महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों को यथास्थान अन्तःस्थापित किया गया है। अतः यह पुस्तक विधि विद्यार्थीयों के उपयोगार्थ लिखि गई है।

    इस पुस्तक ”माध्यस्थता, सुलह एवं वैकल्पिक विवाद निवारण विधि“ विधि के छात्रों के लिए अत्यन्त उपयोगी सिद्वहोगी। पुस्तक में मूल विषय को क्रमबद्व विभिन्न अध्यायों मे विभाजित करके सरल भाषा में बोधगम्य बनाने का प्रसास किया गया है। पुस्तक में पूर्व के महत्वपूर्ण वादनिर्णयों एवं नवीनतम् वादनिर्णयों को सम्मिलित किया है।

    यह पुस्तक न केवल विधि विद्यार्थीयों के लिए उपयोगी होगी बल्कि अनुसंधान के छात्रों, अध्यापकों, अधिवक्ताओं, न्यायविदों, सामाजिक संस्थाओं, प्रतियोगी परीक्षा देने वाले प्ररीक्षार्थी एवं सामान्य व्यक्तियों के लिए भी समान रूप से उपयोगी होगी।

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    डॉ. नीतू नुवाल वर्तमान में मोदी यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, लक्ष्मणगढ़ के ‘स्कूल ऑफ लॉ’ (विधि संकाय) में कार्यरत हैं। वह करियर पॉइंट यूनिवर्सिटी, कोटा के ‘स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज एंड गवर्नेंस’ की पूर्व डीन (अधिष्ठाता) रह चुकी हैं। उन्हें कानूनीध्विधि क्षेत्र में 20 से अधिक वर्षों का व्यापक अनुभव है।

    शैक्षणिक योग्यता

    ऽ  पीएच.डी. (च्ीण्क्ण्): उन्होंने वर्ष 2011 में कोटा विश्वविद्यालय, कोटा से कानून (विधि) में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।

    ऽ  पीजीडीएलएल (च्ळक्स्स्): उन्होंने वर्ष 2012 में वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (टडव्न्), कोटा से श्रम कानून में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया।

    ऽ  प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमः उन्होंने वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान, लखनऊ से एक उन्नत प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम, ‘लॉ विद लैब्सः साइबर फॉरेंसिक इन प्रैक्टिस’ पूरा किया।

    ऽ  प्रमाणित ट्रेनरः राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (छप्ैज्) से प्रशिक्षित, प्रमाणित पॉश (च्व्ैभ् – कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम) और पोक्सो (च्व्ब्ैव् – यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) ट्रेनर।

    अनुसंधान और प्रकाशन (त्मेमंतबी – च्नइसपबंजपवदे)

    डॉ. नुवाल ने विभिन्न सामाजिक-कानूनी पहलुओं पर कई लेखों और शोध पत्रों में अपना योगदान दिया है, जो देश की अग्रणी लॉ पत्रिकाओं (श्रवनतदंसे), समाचार पत्रों और कानूनी प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कई अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार, सम्मेलन, संगोष्ठी (ेलउचवेपनउ) और कार्यशालाओं (ूवतोीवचे) का आयोजन और उनमें सहभागिता की है।

    अकादमिक और सामाजिक क्षेत्रों में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और योगदान के लिए उन्हें विभिन्न शैक्षणिक, सामाजिक और प्रशासनिक संस्थानों द्वारा कई पुरस्कारों, पदकों, ट्रॉफियों और प्रमाणपत्रों से सम्मानित किया जा चुका है।

    प्रकाशित पुस्तकें

    डॉ. नुवाल को अनुसंधान के क्षेत्र में गहरा अनुभव है और वह अब तक चार पुस्तकें लिख चुकी हैं:

    1. प्रथम पुस्तक: डोमेस्टिक वायलेंस अगेंस्ट वीमेनः लीगल प्रोटेक्शन, लेजिस्लेटिव एंड ज्यूडिशियल एस्पेक्ट्स (रीगल पब्लिकेशन्स, नई दिल्ली, 2013)
    2. द्वितीय पुस्तक: ह्यूमन राइट एंड वीमेन जस्टिस, इंटरनेशनल एंड नेशनल परस्पेक्टिव्स (रीगल पब्लिकेशन्स, नई दिल्ली, 2015)
    3. तृतीय पुस्तक: ह्यूमन राइट्स एंड द लॉ (रीगल पब्लिकेशन्स, नई दिल्ली, 2017)
    4. चतुर्थ पुस्तक: साइबर क्राइम अगेंस्ट वीमेन एंड चिल्ड्रनः प्रिवेंटिव मेजर्स (शांडिल्य पब्लिकेशन्स, नई दिल्ली, 2021)

    अनुसंधान मार्गदर्शन एवं सामाजिक योगदान

    ऽ  पीएच.डी. गाइड: वह मास्टर ऑफ लॉ (स्स्ण्डण्) और पीएच.डी. स्तर पर अनुसंधान गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल हैं। वह करियर पॉइंट यूनिवर्सिटी, कोटा (राजस्थान) और मोदी यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, लक्ष्मणगढ़ में पीएच.डी. डिग्री के लिए एक मान्यता प्राप्त गाइड (मार्गदर्शक) हैं।

    ऽ  सफलतापूर्वक मार्गदर्शित शोध: उनके मार्गदर्शन (ैनचमतअपेपवद) में 14 पीएच.डी. डिग्रियां और सह-मार्गदर्शन (ब्व.ैनचमतअपेपवद) में 3 पीएच.डी. डिग्रियां प्रदान की जा चुकी हैं। वह पीएच.डी. थीसिस मूल्यांकन और मौखिक परीक्षा (टपअं.टवबम) के लिए एक बाहरी परीक्षक (म्गजमतदंस म्गंउपदमत) भी हैं।

    ऽ  पेटेंट: उनके नाम पर एक पेटेंट स्वीकृत (ळतंदज) हो चुका है।

    ऽ  सामाजिक कार्य: वह समाज, विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों, गरीबों और वंचित लोगों के सशक्तिकरण और कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने में सक्रिय रूप से जुटी हुई हैं और एक गतिशील विशेषज्ञ (त्मेवनतबम च्मतेवद) के रूप में कार्य करती हैं।

    ऽ  एनजीओ (छळव्): वह सरकार द्वारा पंजीकृत गैर-सरकारी संगठन (छळव्)- ‘मुस्कान वेलफेयर सोसाइटी’ की अध्यक्ष हैं।