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Book & Detail
अदृश्य आर्थिक युद्ध (Invisible Economic War)
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Author : Ritu Kumari, Rup Kumar Year of Publication : 2026 ISBN : 9789393934345 Language : Hindi Binding : Hardcover Pages : 176 Size : 24 cm Categories : 2026, Economics, New Books Price : 600
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पुस्तक
अदृश्य आर्थिक युद्ध महज एक किताब से कहीं अधिक है- यह आज की दुनिया को आकार देने वाली छिपी हुई आर्थिक शक्तियों का शोध-आधारित अन्वेषण है। अध्ययन, अनुभव और विश्लेषण के आधार पर, यह बताता है कि आधुनिक संघर्ष अब केवल सैन्य शक्ति के बजाय व्यापार, ऊर्जा, वित्त और आर्थिक नीतियों के माध्यम से ही लड़े जा रहे हैं। यह पुस्तक वैश्विक घटनाओं का आर्थिक परिप्रेक्ष्य से विश्लेषण करती है और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं और रोजमर्रा की जिंदगी पर उनके प्रभाव को उजागर करती है। यह इस बात पर जोर देती है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था आपस में गहराई से जुड़ी हुई है, जहां एक क्षेत्र में संकट पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग, संतुलित नीतियां और सतत विकास आवश्यक हो जाते हैं। प्रस्तुत विचार वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के विकास पर किए गए शोध और अवलोकन पर आधारित हैं। जैसे-जैसे विश्व अर्थव्यवस्था बदलती रहेगी, भविष्य के संस्करणों में नए विचार और परिप्रेक्ष्य जोड़े जा सकते हैं।
सबसे बढ़कर, यह पुस्तक पाठकों को वैश्विक अर्थव्यवस्था को बेहतर ढंग से समझने में मदद् करने का एक विनम्र प्रयास है। यह मात्र एक किताब नहीं है, बल्कि उन अदृश्य आर्थिक शक्तियों की एक चिंतन यात्रा है जो हमारी दुनिया और हमारे जीवन को आकार देती हैं।
विषय सूची: अदृश्य आर्थिक युद्ध की अवधारणाय अदृश्य रणभूमिय तेल की बूंदें और मानवता के आँसूय हरमुज रणनीति और वैश्विक नाकाबंदीय कराहते लोग: अर्थव्यवस्था का मानवीय चेहराय समाधान या सर्वनाश?य कोविड-19 का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव (आर्थिक लॉकडाउन की वापसी)य भू-राजनीतिक संघर्ष और आर्थिक अस्थिरताय भारत में तेल और गैस का बाजार और आपूर्ति: विस्तृत विश्लेषणय अनाज की राजनीति: थाली पर अदृश्य हमलाय रोटी, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा संकटय वैश्विक आर्थिक मंदी और भविष्य के जोखिमय भविष्य की संभावनाएँ और आर्थिक पुनर्निर्माणय डिजिटल कुरुक्षेत्र: डेटा, चिप्स और एआई (।प्)य कर्ज की कूटनीति और नया आर्थिक उपनिवेशवादय वैश्विक विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला का पुनर्गठनय ऊर्जा संकट और वैश्विक अर्थव्यवस्थाय भारत और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर प्रभाव: ऊर्जा, सुरक्षा और आर्थिक दबावय वैश्विक आर्थिक मंदी और भविष्य के जोखिमय युद्ध, रोटी और अर्थव्यवस्था: ईरान-इजराइल-अमेरिका संघर्ष के संदर्भ में हर पहलू का विश्लेषणय भारत और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर प्रभावय वैश्विक आर्थिक मंदी और भविष्य के जोखिम।लेखक के परिचय
डॉ. रितु कुमारी, भागलपुर स्थित तिलका मांझी विश्वविद्यालय, भागलपुर (बिहार) के टीएनबी कॉलेज में अर्थशास्त्र विषय की सहायक प्रोफेसर (अतिथि) हैं। अर्थशास्त्र में पीएचडी की उपाधि प्राप्त रितु कुमारी आर्थिक विकास, कृषि, वित्तीय साक्षरता और ग्रामीण आर्थिक नीतियों में विशेषज्ञता रखती हैं। उनका शोध भारत की अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से बिहार जैसे राज्यों में, के परिवर्तन में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर केंद्रित है। शिक्षा से गहराई से जुड़े परिवार से आने वाली डॉ. रितु कुमारी अपने दादा श्री रामेश्वर प्रसाद चैधरी, अपने ससुर स्वर्गीय रामानंद चैधरी, सास श्रीमती मंजू देवी, अपने माता स्वर्गीय मनोरमा देवी, पिता श्री रंजन प्रसाद चैधरी और अपने विस्तारित परिवार के अमूल्य सहयोग को स्वीकार करती हैं, जिन्होंने उनकी शैक्षणिक यात्रा को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
श्री रूप कुमार, भागलपुर के एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता हैं, जो बिहार के भागलपुर जिले के खरीक प्रखंड के कठेला गांव के एक शिक्षित परिवार से संबंध रखते हैं। वे स्व. रामानंद चैधरी के छोटे पुत्र हैं, जो स्वयं एक शिक्षक थे। रूप कुमार के दादा स्व. वशिष्ठ नारायण चैधरी भी एक शिक्षक थे, और उनके पिताजी के मामूजी, स्व. भुवनेश्वर सिंह भूवन, नामी स्वतंत्रता सेनानी और भागलपुर के प्रमुख क्रिमिनल अधिवक्ता थे। इसके अलावा, रूप कुमार के बड़े पिता स्व. महेश नारायण चैधरी कटिहार कोर्ट के एक नामी अधिवक्ता थे, जिन्होंने कानून के क्षेत्र में अपने कार्यों से कई पहचान बनाई। रूप कुमार के एक चाचा श्री कैलाश राय भी नवगछिया सिविल कोर्ट के बड़े नामी वकील हैं। व एक चाचा स्व. सत्येंद्र नारायण चैधरी उर्फ कौशल बाबू भी वकालत पेशे में काफी नामी वकील थे। रूप कुमार ने कानून में अपनी शिक्षा एलएलबी और एलएलएम के माध्यम से प्राप्त की है। साथ ही, वे पत्रकारिता में भी मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन किए हुए हैं, जो उनके बहु-आयामी ज्ञान और दृष्टिकोण को दर्शाता है। उनके द्वारा लिखे गए कई शोध आलेख कानूनी क्षेत्र में प्रकाशित हुए हैं, जो उनकी गहरी समझ और प्रतिबद्धता को प्रमाणित करते हैं।
रूप कुमार का जीवन समर्पण, शिक्षा, और न्याय के प्रति निष्ठा का प्रतीक है, और वे एक उभरते हुए अधविक्ता कानूनी विशेषज्ञ व विचारक के रूप में समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उनका मूल मंत्र है न्याय सब के लिए जस्टिस इज मोटो। सरल, सुगम व सुलभ तरीके से आम लोगों को कैसे न्याय मिले उनकी समस्या का समाधान हो यही लेखक का उद्देश्य है।

